मॉस्को में पुतिन से मिले एस. जयशंकर, बोले- सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद भारत-रूस संबंध सबसे स्थिर
नई दिल्ली/मॉस्को: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस की राजधानी मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। यह मुलाकात रूस की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान हुई, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद भारत-रूस संबंध दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में से एक रहे हैं।
भारत-रूस रिश्तों का ऐतिहासिक आधार
भारत और रूस (सोवियत संघ के समय से) के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं। स्वतंत्रता के बाद से ही रूस ने भारत के आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग किया है। चाहे 1971 का भारत-पाक युद्ध हो या स्पेस टेक्नोलॉजी का क्षेत्र, रूस हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा। जयशंकर ने अपने संबोधन में इसी ऐतिहासिक भरोसे की नींव को याद दिलाया।
पुतिन से मुलाकात में क्या हुई चर्चा?
- ऊर्जा सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया।
- रक्षा और हथियार निर्माण में संयुक्त परियोजनाओं पर बातचीत हुई।
- यूक्रेन संकट और उसके वैश्विक प्रभावों पर भी चर्चा की गई।
- भारत-रूस के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों पर सकारात्मक रुख सामने आया।
जयशंकर का बयान
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि “भारत-रूस संबंध सिर्फ रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह विश्वास और स्थिरता की मिसाल हैं। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद की दुनिया में ऐसे रिश्ते बहुत दुर्लभ हैं।”
भारत-रूस व्यापार और ऊर्जा सहयोग
भारत और रूस के बीच व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी आई है। खासतौर पर ऊर्जा क्षेत्र में रूस भारत को कच्चा तेल बड़ी मात्रा में निर्यात कर रहा है। इसके अलावा, गैस और परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर भी दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं।
रक्षा सहयोग की मजबूती
भारत की रक्षा प्रणाली में रूस की भूमिका अहम रही है। मिग-29, सुखोई-30, एस-400 मिसाइल सिस्टम जैसे हथियार और विमान भारत की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करते हैं। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उत्पादन भी साझेदारी को गहरा बना रहे हैं।
यूक्रेन युद्ध पर भारत की भूमिका
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने हमेशा संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। जयशंकर ने मॉस्को में भी यही दोहराया कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और शांति बहाल करने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए।
भविष्य की योजनाएं
भारत-रूस के बीच विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की योजना है। दोनों देशों ने यह भी तय किया कि वे मिलकर बहुपक्षीय मंचों जैसे BRICS, SCO और G20 पर अपनी साझेदारी को और आगे बढ़ाएंगे।
भारत-रूस संबंध: क्यों हैं सबसे स्थिर?
- दशकों पुराना विश्वास और सहयोग।
- हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देना।
- रक्षा, ऊर्जा और व्यापार में गहरी साझेदारी।
- वैश्विक मंचों पर साझा दृष्टिकोण।
निष्कर्ष
विदेश मंत्री जयशंकर और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत-रूस संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और भावनात्मक गहराई भी रखते हैं। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद से लेकर आज तक दोनों देशों ने एक-दूसरे पर भरोसा किया है और यही कारण है कि इन रिश्तों को दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में गिना जाता है।
